बोलना ही होगा (bolna hi how) स्पेशल:
कुछ साल पहले लखनऊ एसएनए में एक सामाजिक कार्यक्रम था। जिसमें मैं भी शामिल था। देश भर से युवा शख्सियतों को बुलाया गया था। नीला गमछा लपेटे, मूंछों पर ताव देते एक युवा ने अपने भाषण में कहा ' मैं पेशे से वकील हूँ। समाज (बहुजन समाज) पर जब अत्याचार होता है तो मेरा खून खौलता है। इसीलिए एक संगठन बनाया है, जिसके जरिये देश के युवाओं को जोड़ रहा हूँ। ताकि जब भी कोई हमारे अधिकारों का हनन करने की कोशिश करे तो उसको मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। मैं आपसे अपील करता हूँ कि आप दस हजार का महंगा मोबाइल खरीदते हैं, उसकी जगह पर कट्टा खरीदिये और कोई हमारी बहन बेटी पर आंख उठाए तो उसको वहीं सबक सिखाइये। आपका केस लड़ने मैं आऊंगा। निःशुल्क केस लड़ूंगा'।
इस बयान पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। शोधार्थी और हमारे साथी श्रेयत बौद्ध ने पूछा कि जिस बाबा साहब का नाम लेते हैं। उनके नारे लगाते हैं, अगर वो भी अन्याय के खिलाफ कलम की जगह बंदूक चुनते तो क्या आज आप उनका जिक्र करते? आज हमारा समाज कहाँ होता? इस प्रतिक्रिया पर हंगामा मच गया। उस युवक के समर्थकों ने बवाल करना शुरू कर दिया। लोगों ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया।
इस घटना के कुछ महीने बाद सहारनपुर में जातीय संघर्ष हुआ। उसके बाद वह युवा देश में बहुजन युवाओं के सामने नायक बनकर उभरा। जेल भी गया, रासुका भी लगी। उसके साथ कई लोगों पर भी सरकार ने रासुका लगाई। इसके बाद देश ही नहीं दुनिया भर से उस युवा के पक्ष में आवाज उठी, लोगों हर तरीके से मदद की। वो जेल से बाहर आया और तमाम उठापटक के बाद देश की राजनीति में चर्चित चेहरा बना। समाज के असल मुद्दों से मुंह मोड़ने वाला मीडिया हाथों-हाथ ले रहा है। देश के युवाओं का केस फ्री लड़ने का दावा करने वाला वह युवा चंकाचौंध में ऐसा खोया है कि अब अपने संघर्ष के साथियों का (जो जेल में हैं) नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझता है।
आज बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम के जन्मदिन पर उसने 'आजाद समाज पार्टी' नाम से राजनीतिक दल बनाया है। नाम है चंद्रशेखर आजाद। भीम आर्मी का मुखिया। जिसे रावण के नाम से भी लोग जानते हैं।
सवाल वही है- क्या वो आपके लिये लड़ेगा? सवाल पूछियेगा कि सहारनपुर की जातीय हिंसा में उसके साथ जेल गए लोग अब कहाँ और किस हालत में हैं? क्या आप कलम की जगह कट्टा उठाना पसंद करेंगे? पूछियेगा कि बाबा साहब और मान्यवर भी कट्टा उठा लेते तो आज क्या होता?
- सुशील
नोट- फेसबुक पर ये पोस्ट 15 मार्च 2020 को लिखी थी। इसी दिन चंद्रशेखर आजाद ने 'आजाद समाज पार्टी' नाम के नए राजनीतिक दल का गठन किया था।
सचेत रहने की जरूरत
ReplyDelete