बोलना ही होगा ( bolna hi hoga) : स्पेशल
एक कहावत है 'तेल लगाना', शहरों में ये तेल 'बटर' भी हो जाता है। खैर मुद्दा ये है कि कुछ लोगों की पूरी जिंदगी इसी के भरोसे ही टिकी हुई है। वो तेल लगाने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपने साहबान को सबसे आगे दिखने के चक्कर में सही-गलत को परखने का इंतजार भी करना मुनासिब नहीं समझते। अपनी तमाम डिग्रियां, ओहदा सब इसी तेल में मिला देते हैं, कि बस.. साहब किसी तरह खुश रहें। लेकिन, ये तेल लगाने की फितरत कई जगहों पर पोपट भी बना देती हैं। अब इन्हीं पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी को देख लीजिए। यूपी के सीएम योगी जी के पिताजी को उन्होंने श्रद्धांजलि तक दे डाली। जबकि वे अभी भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इतना ही नहीं तेल को और गाढ़ा बनाने के चक्कर में अंतिम दर्शन करते गढ़वाल सांसद की फ़ोटो भी लेकर आ गए। ऐसे लोगों को क्या ही कहा जाए अब।
अभी हाल ही में ये कोरोना से डाउन हो रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का सुझाव देकर भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। उसमें भी तेल की प्रचुर मात्रा का उपयोग करते हुए कहा था कि 10 साल तक चुनाव ना हो और मौजूदा सरकार ही नियमित रहे। मोदी जी पीएम बने रहें। क्योंकि चुनाव में काफी पैसा खर्च होता है... बाकी के सुझाव भी रहे होंगे इनके पास लेकिन साहब को फोकट के 10 साल और तक पीएम बनाने में जो तेल की उपयोगिता थी वो और कहां मिलती?
ऐसे लोग हर जगह, हर अवस्था में मिलते हैं। जो जानते हैं कि उनकी जिंदगी भी इसी तेल से चल रही है, वो भी दूसरों को तेलु साबित करने में लगे रहते हैं...
ये लास्ट वाला कुछ विशेष लोगों के लिए है...
खैर आप दुआ कीजिये कि सीएम योगी जी के पिता दीर्घायु हों.. वो ये जिंदगी-मौत के बीच की जंग जीतें...
बाकी भाषाई दुष्टता के लिए #गुस्ताखिमाफ तो है ही...
नोट- ये पोस्ट फेसबुक पर 20 अप्रैल 2020 को लिखी थी, जब यूपी के सीएम योगी के पिता की मृत्यु की अफवाह उड़ी थी और कई लोग बिना जांच पड़ताल किये श्रद्धांजलि देने में लग गए थे। हालांकि अगले दिन यानी 21 अप्रैल को सीएम योगी के पिता का देहावसान हो गया था।
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भक्तों का कुछ नहीं हो सकता...
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