बोलना ही होगा (bolna hi hoga) Exclusive:
कोरोना महामारी के बीच इससे निजात पाने के उपायों में ही पूरा विश्व उलझा हुआ है। भारत भी अन्य देशों की तरह कोशिशें लगातार कर रहा है। लेकिन इस बीच करोड़ों लोगों के सामने बेरोजगार होने का संकट भी मंडराने लगा है। अगर फिक्की की मानें तो अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक करीब 4 हजार करोड़ नौकरियां लोगों की छीन सकती हैं। फिक्की प्रेसिडेंट संगीत रेड्डी का दावा है कि कोरोना महामारी में प्रतिदिन 40 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेहड़ी, पटरी, ठेले-खोमचों वालों पर शामत
असंगठित क्षेत्रों मसलन रेहड़ी, पटरी, ठेले-खोमचे लगाकर अपनी आजीविका करने वालों पर तो शामत आ गई है। इस क्षेत्र से प्रतिदिन आठ हजार करोड़ का टर्नओवर होता है। लेकिन, लॉकडाउन में करीब 95 फीसदी काम ठप है। फल, सब्जी, किराना आदि की जरूरत वाले कारोबार भी सशर्त चलाये जा रहे हैं।
नोटबन्दी ने छीनी थीं 50 लाख नौकरियां
साल 2016 के नवम्बर में पीएम मोदी ने नोटबन्दी का एलान किया था। जिसमें 500 व 1000 की नोटों के प्रचलन को बंद कर दिया था। अचानक लिए गये इस निर्णय से देश की अर्थव्यवस्था को करारा आघात पहुंचा था। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के मुताबिक नवम्बर 2016 से 2018 के बीच करीब 50 लाख लोगों की नौकरियां छीनी थीं। वहीं जेएनयू के अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार के मुताबिक करीब 27 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
जीएसटी भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा
एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया था। दावा किया गया कि कर संग्रह में इजाफा होगा। लेकिन, इसके ठीक उलट कर संग्रह 21.33 से 5.08 फीसदी पर आ गया। 2019 में इंडिया टुडे के एक सर्वे के मुताबिक नौकरीपेशा 44 फीसदी का मानना था कि इससे उनको नुकसान हुआ हैं। वहीं मात्र 22 फीसदी ने माना था कि इससे सुधार हुआ है। वहीं कारोबारियों की मानें तो 43 फीसदी ने नुकसान और 21 फीसदी ने फायदा बताया था।
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खतरनाक समय
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