भीगा तन भीगा मन भीगी आंखों से कहता वो, मेरे नही तेरे नही किराए के घर में रहता वो,वैसे तो गाँव के घर में उसका बड़ा परिवार है,लेकिन नौकरी की आश में यहाँ अकेले रहता वो यह परिचय उन सभी नौजवान छात्रों का जो अपना घर परिवार छोड़ बड़े शहरों में बड़ी बड़ी कोचिंग संस्थानों में अफसर बनने की चाह में प्रवेश लेते है। ऐसे नौजवानों का बड़ा अजब सँघर्ष होता है। सुबह एक चाय के साथ दिन शुरू होता है और रात को रुम पर जाकर खाना मिलता है। घर से पिता जी सीमित पैसे भेजते है। उसी से महीने में किताबे, प्रतियोगिता दर्पण, अखबार और अपना खर्चा चलाना है। इधर एग्जाम का फॉर्म भरा तो इस बात का डर की कही पेपर लीक ना हो जाए। अधर में फसा जीवन इन सभी संघर्षो से गुजर एक अधिकारी तैयार होता है।
देश के निर्माण में अपना जीवन लगाता है। हम इस लॉकडॉन दौर में यह बात क्यों कर रहे है आप सोच रहे होंगे हम बात इसीलिए कर रहे है क्योंकि यही देश का भविष्य संकट में उसके पास अपने रूम का किराया भरने के पैसे नही है। इसिलए छात्र सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाकर किराया माफी की मांग कर रहे है। इसीलिए एक जागरूक नागरिक और छात्र होने के नाते मेरा आपका सबका फर्ज है की उनके लिए एक ट्वीट जरूर करे। #norentforstudents का समर्थन कर ट्वीट करे।
लॉकडॉन ने देश की अर्थव्यवस्था पर तो इसका असर पड़ा ही रहा है, साथ ही कई बेरोज़गार छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। ये वे छात्र हैं जो कई सरकारी व गैर सरकारी परीक्षाओं की या विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
इनमें से कई छात्र ऐसे हैं जिनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर है और वे जैसे तैसे दूसरे शहरों में अपने रहने का इंतज़ाम, खाने पीने, मेस की फीस, बिजली का बिल, कोचिंग फीस, परिवहन के खर्चे, किताबों व नोट्स के खर्चों के लिए अपने परिवारों पर निर्भर हैं।
अब जब लॉकडाउन में इन छात्रों का परिवार ही अपना पेट भरने को लेकर संघर्ष कर रहा है तो वो गरीब माता-पिता अपने बच्चे को मकान का किराया कैसे देंगे?
इसीलिए युवा हल्ला बोल ने ये पेटीशन शुरू की है ताकि सरकार देश के छात्रों की किरायामाफ़ी को लेकर स्पष्ट आदेश जारी करे, ताकि किसी भी छात्र को किराए के लिए प्रताड़ित ना किया जाए।
29 मार्च 2020 को गृह मंत्रालय द्वारा सभी सरकारों को यह आदेश दिया गया कि लॉकडाउन के दौरान कोई मकान मालिक किसी भी विद्यार्थी किरायेदार को नहीं निकाल सकता है। सरकार का ये कदम प्रशंसायोग्य है पर इस आदेश में किराए को लेकर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है ताकि इसपर कोई दुविधा या असमंजस की स्थिति न रहे।
इसमें कोई शक नहीं कि सरकार अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए इस भयावह महामारी से उबरने की कोशिश कर रही है। किंतु सैंकड़ों बेरोज़गार छात्रों को सरकार की स्पष्ट नीतियों के अभाव में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में सरकार को ऐसे छात्र-छात्राओ के किराए माफी का आदेश जारी करना चाहिए। क्योंकि इन नौजवानों पर ही देश का भविष्य टिका है। सरकार को इन नौजवानों को एक पहल करते हुए विशेष आर्थिक मदद करने की योजना बनानी चाहिए। क्योंकि हमारे देश में बड़ी आबादी ऐसे नौजवानो की है।
लेखक- सतीश समर
समाजवादी चिंतक



बढ़िया लेख...
ReplyDeleteWell done satish bhai💓💓
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