छात्रजीवन : एक कमीनी कौम

बहुत पहले ख्याल में था कि एक दिन अपनी क्लास की कुछ अनकही कहानियाँ लिखूंगा कुछ हंसी ठिठोली टाइप की । सभी सहपाठियों के बारे में अच्छे से समझकर उनकी हरकतों को मज़ाकिया अंदाज़ में अपने शब्द दूंगा । ये ख्याल बहुत दिनों से पक रहा था और एक दिन आदित्य  भैया की एक पोस्ट हाथ लगी जो उन्होंने अपने सहपाठियों यानी मेरे सीनियर के बारे में ज़िक्र किया अपने बेबाक अंदाज़ में । उसी दिन मैंने ठान लिया अब इस योजना को मूर्त रूप जल्द ही दूंगा । फिर आखिर वो दिन आज आ ही गया । बैठ गया उनकी हरकतों को वो शब्द देने जो मैंने पिछले डेढ़ सालों में देखा जाना व समझा है । ये ज़िक्र हालांकि उनकी व्यक्तिगत पहचान का असली जामा नही है फिर भी मुकुल सर के शब्दों में कि " ये स्टूडेंट की कौम निहायत कमीनी होती है" को बस एक कमीनापन अंदाज़ देने की कोशिश करूँगा । हालांकि मैं आगे हर एक के बारे में या समूह के बारे में कुछ व्यक्तिगत समालोचना करूँगा इसलिए इसे कोई 'किडनी' पे ना ले इसलिए सबसे पहले अपने अंदाज़ में #गुस्ताखीमाफ . पिछले साढ़े 6 साल से मैं विश्वविद्यालय का हिस्सा रहा हूँ और लगातार मैंने बहुत से दोस्त बनाये जिनसे आज भी किसी ना किसी माध्यम से जुड़ने की कोशिश में रहता हूँ । लेकिन आज ये पहली बार है की अपने किसी दोस्त या कक्षा समूह के बारे में एक लेख लिखने जा रहा हूँ । पिछले डेढ़ सालों का अनुभव आपके साथ का अज़ीज़ अनुभव है ।
   सबसे पहले अदिति ,आसिफा और गुंजन की जोड़ी से शुरुआत करूँगा हालांकि इन लोगों से ज्यादा बात करने का मौका नही मिला लेकिन फिर भी क्लास की सबसे शांत और अलग दिखने वालों में से एक लड़की अदिति । इनका शौक़ स्केच बनाना है जिस कला में ये पारंगत हैं और सपना एक सफल रेडियो आर जे बनना । वैसे माना जाता है कि आर जे वाचाल स्वभाव के होते हैं लेकिन अदिति का स्वभाव बिलकुल शांत है। लखनऊ की नज़ाकत ,नफासत का सुन्दर मिश्रण इनके स्वभाव में है ।जहाँ तक मुझे याद है इन्होंने कभी भूले से भी मुझे तुम नही कहा होगा । हमेशा 'आप' शब्द इनकी ज़ुबाँ पे रहता है । इनकी कविताओं में कृष्ण के प्रति लगाव दीखता है इस लिहाज़ से मैं इन्हें क्लास की 'मीरा' कहूँगा जिनकी कविताएं कृष्ण प्रेम के इर्द गिर्द घूमती हैं । इनकी सबसे ख़ास दिखने वाली सहेली हैं गुंजन । गुंजन से भी बहुत बातचीत नही हुई जिससे इनके बारे में ज्यादा जानने का मौका नही मिला । एक दुखद बात ये हुई 2nd सेमेस्टर के बाद कि अदिति ने पढ़ाई छोड़ दी जिसका कारण उन्होंने शायद ही किसी को बताया हो। तो हम भी उस कारण से अनभिज्ञ ही हैं । ठीक यही हाल आसिफा का भी है अगर कोई मुझसे किसी को सबसे कम बोलने का अवार्ड देने को कहे तो मैं आसिफा को दूंगा ।
   अब इनसे मिलिए ये हैं मुकुल सर के शब्दों में क्लास के सबसे अलग द्वीप जिनमे चारु,प्रिति,अनीता,मोनिका और शिखा । चारु की सबसे अच्छी खासियत है इनका मिलनसार स्वभाव और सबकी केयर । इनसे इनका जीवनसाथी निःसंदेह बहुत खुश रहेगा । हाँ इनको हँसना बहुत पसंद है जब भी बात करो हँसते हुए ही इनकी बात निकलती है । अगर आपने एक चुटकुला इनको गलती से सुना दिया तो ये हँसते हँसते ढेर ।इनकी एक्टिंग की प्रतिभा की मैं दाद देता हूँ क्या गज़ब एक्टिंग की थी इन्होंने । अब प्रीति,  प्रिति की सबसे बड़ी खासियत है इनका पत्रकारिता करियर में सफल 'क्राइम रिपोर्टर' बनना । मैं इनके सपने और हिम्मत को दाद देता हूँ बतौर लड़की ये बहुत कठिन काम है । प्रीति को मैं इसलिए भी विशेष याद रखूँगा क्योंकि मेरी फ़िल्म 'ब्लंडर बाबा' की मुख्य पात्र जो हैं । बोलने के लिहाज़ से मैं खुद को इनका समकक्ष मानता हूँ । क्योंकि मैं भी बहुत बोलता हूँ । इनका वो इंटरविव मुझे हमेशा याद रहेगा जो 3rd सेमेस्टर में पोस्टर वाले विषय पर दिया , जिस लहजे में इन्होंने साक्षात्कार दिया है और हमें आकर बताया उसके बाद मुंह से सिर्फ शाबाश ही निकला । इनके जवाब का जिक्र एक सवाल के साथ देता हूँ । सवाल-धरती क्या है ? प्रिति- धरती यही है जिसपे हम खड़े हैं । सवाल- दिमाग है तुम्हारे पास ? प्रीति- दिमाग है तभी तो जवाब दे रही हूँ । अब इनके बारे में क्या बताऊँ , ये निजी जीवन में खुले विचारों वाली हैं आम लड़की हैं इनके बिचार इन्हें खाश बनाते हैं। अब बारी अनीता की , अनीता बहुत कुछ कहना और करना चाहती हैं लेकिन वक़्त पर संकोच कर जाती हैं जिसको इन्होंने खुद स्वीकारा है । इनके अंदर टैलेंट भी बहुत छिपा हुआ है जो रेडियो कार्यक्रम और वीडियो प्ले के दौरान स्क्रिप्ट लिखने और एक्टिंग में दिखा । इस द्वीप में एक नाम और है वो हैं मोनिका जिनको मैं डायरेक्टर कहके संबोधित करता हूँ क्योंकि वीडियो प्ले में ये डायरेक्टर ही थी । इनकी खूबी है कविताएं लिखना ,स्क्रिप्ट लिखना नए विचारों को सोचना । इनसे बातचीत का मेरा जरिया चिढ़ाने और हंसी मज़ाक से शुरू होता है । हाँ इनको मेरी अधूरी प्रेम कहानी से ज्यादा लगाव है । कई बार इन्होंने जानने की कोशिश की लेकिन मैं ही टाल गया । एक और नाम है शिखा ,मेरे प्ले की दूसरी अहम किरदार । ये ज्यादा मतलब किसी अन्य से नही रखती पढ़ने में ही व्यस्त रहती हैं और मुंह पे सुना देना इनकी विशेष आदत है । मेरे साथ एक बात अच्छी रही है कि मुकुल सर के एक सवाल पे इन्हें मेरे साथ काम करके अच्छा लगा । इस तारीफ़ का ज़िक्र इसलिए क्योंकि क्लास में 'अविनाश काण्ड' सबको पता ही है ।
        ज़िक़्र के इस आगे की कड़ी में मैं अविनाश,मनोज जी, फैज़ल,और निकी को लूंगा । हालांकि ये किसी ग्रुप की तरह नही हैं ना ही समानांतर सी कोई बात है एक को छोड़ कर वो ये है कि मनोज जी और अविनाश दोनों वक़ालत के पेशे से हैं । मनोज जी उम्र और हर लिहाज से हमसे काफी 20 हैं इसलिए इनका अनुभव इनकी जानकारी और इनका आचरण हमे अनायास ही आकर्षित करता है । ये क्लास में आते कम हैं इसलिए इनसे कम बातचीत हो पाई है , लेकिन जब भी कोई शिगूफा छिड़ता है तो इनकी बातें सुनते रहने का मन करता है । इस MJMC में आने के पहले से मैं अविनाश को जानता था लेकिन ज्यादा मुखर रूप में यहां आने के बाद ही जान पाया क्योंकि इनकी ll.b मेरे भैया के साथ की है । सवालों का एक बड़ा घड़ा लेके चलते हैं कभी कभी खुद सवालों में उलझ जाते हैं ,अपने सवालों का निराकरण ये मुकुल सर से चाहते हैं । ख़ास तौर पर मेरी बाते सुनकर मुझ पर आक्रामक रूप से हावी भी हो जाते हैं । जिसका कोपभाजन मैं 2 बार बन चुका हूँ । हालांकि इनके और मेरे बीच आत्मीय रिश्ता है । अब बात करते हैं फैज़ल की , ये ज़नाब पूरे सेमेस्टर धुप छांव की तरह क्लास में आते हैं और एग्जाम टाइम नोट्स के लिए परेशान हो जाते हैं । इनका लगाव सबसे ज्यादा मुकुल सर से है । ये इस लगाव के लिए सोशल साइट्स पर अपने इमोशन के प्रदर्शन के लिए (मुकुल सर के प्रति) पूरी क्लास से चर्चा बटोर चुके हैं । इस कड़ी में एक नाम जुड़ता है निकी का ये भी नोट्स के लिए परेशान रहती है ,इनके बारे में इतना ही जान पाया हूँ ....................क्रमशः (आगे बचे लोगों की कहानी अगले लेख में ).....
 

Comments

  1. अच्छा लिखा।

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  2. बहुत बढ़िया सुशील .. मुझे तुम्हारा अंदाज़े बयां पसंद आया |

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