पार्ट 1 के बाद पार्ट 2 की शेष कहानी ----
अब आती हैं, काशिका और जेसिका की जोड़ी और कोमल,जूही,दीपशिखा की ....सबसे पहले काशिका और जेसिका,इनमें से जेसिका को जब पहली बार क्लास में देखा तो और बोलते सुना तो मुझे लगा ये कोई फिरंगी टाइप की जो अंग्रेजी मा गपर गपर पता ना का बतियावत जात है । मेरी अंग्रेजी कितनी महान है सबको पता है इसलिए ये दुर्घटना लाज़मी थी। इससे बोलने में भी डरता था की क्या पता कुछ अंग्रेजी में ना पूछ दे ।डरे भी क्यों ना सीतापुर ऐसे बोलती थी जैसे लग रहा हो सिंगापुर कह रही हो । काशिका , ये नाम उन शुरू के दिनों का ग्लैमर हुआ करता था, जिसको लेकर लोगों की दीवानगी देखी जा सकती थी ।अतिआधुनिक परिवेश की ये लड़की मेरे देहाती रहन सहन और बोलचाल से दूर ही रहने की किशिश करती थी । करती भी ना क्यों मैं काशिका को कसिका जो कहता था । मेरे द्वारा इसका नाम लेना मानों इसको कोबरा ने डस लिया हो । फ़िल्में रिलीज होने से पहले ही ये सिनेमा हॉल पहुँच जाती हैं , रिलीज होते होते फेसबुक पर वाचिंग ब्ला मूवी का स्टेट्स चेंप देती हैं । फेसबुक के डूइंग और फीलिंग वाले आप्शन का प्रयोग शायद ही इनसे ज्यादा कोई करता हो, अगर ये कहीं कॉफी पीती हैं तो उसको भी फेसबुक पे चिपका देना इनकी फितरतों में शुमार है ।अपने साथ के ही लोगों में हर किसी का मज़ाक बनाना इनका पसन्दीदा कार्य है,मुंह पे तारीफ़ और पीठ पीछे मज़ाक । हालांकि अब मुझे धीरे धीरे अपनी गलती का अहसास होने और तलफ्फुज को सुधारने की कोशिशों से अब ठीक ठाक बोलने की कोशिश करता हूँ । जिससे इसको बड़ी राहत पहुंची है । अब कोमल , ये लड़की सबसे मिल जुल के रहती है थोड़ी सेल्फ़ी की दीवानी है बस । हाँ व्हाट्सएप ग्रुप में अगर किसी ने कोई मैसेज किया तो ये मोहतरमा जरूर उसको अटेंशन देती हैं , बाकायदा इमोजी के साथ । एग्जाम के दिनों में इनका बेस्ट फ्रेंड अविनाश हुआ करते हैं । आगे की कड़ी में एक मुस्कुराता चेहरा अनायास अपनी तरफ ध्यान खींचता है और वो हैं जूही, जी हाँ हम कवियों की श्रेणी में इनको अग्रणी स्थान मैं देता हूँ । रंगोली बनाने की कला इनमे कूट कूट कर भरी है । जब भी कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है तो इनकी और कुसुम की जोड़ी चार चाँद लगा देती है । जिनमे सहयोगी की भूमिका क्लास की तिकड़ी अंजलि , सौम्या और वैशाली की हो जाती है । वैशाली S नही वैशाली T । जूही कविताओं के साथ साथ इमैजिनेशन का भी बखूबी इस्तेमाल करती हैं । जिसकी झलक वीडियो प्ले में देखने को मिली। अब आगे दीपशिखा , दीपशिखा से मेरी कभी बात नही हो पाई , शायद उनकी अंग्रेजी मुझे डराती है या यूँ कह लें कि वो लड़कों में सौरभ से ज्यादा किसी को तवज्जो नही देती । इस तवज्जो वाले मामले में मैं वैसे भी काफी पीछे रहता हूँ , शायद ही कोई तवज्जो देता हो तो किसी एक से क्या शिकायत करना ।
अब हैं क्लास के सबसे सुपर डुपर सितारे अर्पित साहब और वैशाली S की बारी । दोनों कनपुरिया और गज़ब के मेहनती इंसान । दोनों की कोशिश हमेशा कुछ अलग करने की रही है । अर्पित को लोग etv के रविश भी कहते हैं ।लेकिन धर्म से लगाव में ये कमजोर पड़ जाता है और नतीजतन बेवकूफियां हिस्से आ जाती हैं ।इनकी भावनाएं अक्सर आहत होती रहती हैं ।कुछ न कुछ योजनाएं इनके मन में घूमती रहती हैं । लेकिन इनकी आहत होती भावनाओं की वजह से लोग इनसे कटे कटे रहने लगे हैं । इसकी कोशिशें अच्छी और सराहनीय मानी जा सकती हैं । जिसका उदाहरण क्लास में डिबेट आदि का होना है । वैशाली S , हरफनमौला शख्शियत की धनी हैं । इनकी तत्परता और काम के प्रति ईमानदारी का जूनून सबसे अलग रखता है । ये एकमात्र ऐसी हैं जो मुझे मेरी काबिलियत से ज्यादा तवज्जो देती रही हैं । जो इनका बड़प्पन है ।
अब चलते हैं अश्विन,आशुतोष और पवन के पास । अश्विन और आशुतोष दोनों की स्कूलिंग एक साथ की है लेकिन इधर दोनों में बनती कम ठनती ज्यादा है । अश्विन क्लास में भी मोबाइल चलाने में माहिर हैं और कोई सवाल हुआ नही कि उसको गूगल बाबा के शरण में तुरंत भेज देते हैं । आशुतोष , इनकी महानता का ज़िक्र कितना किया जाए टोन मारने में इनको महारत हासिल है । जहाँ जाकर हमारी गालियां खत्म हो जाती हैं वहां से इनकी शुरुआत होती है । इनकी हरकतें मोदी विरोधी हैं क्योंकि ये चाय नही कोल्डड्रिंक पीते हैं । साथ में छोला समोसा हो तो बल्ले बल्ले है फिर । इनकी खुराफातें छूपी रुस्तम हैं जिसका प्रदर्शन कभी हम लोग के सामने कर दिया करते हैं । ब्लंडर बाबा टाइटल इनकी खुराफाती मिज़ाज़ की उपज है । अब आ गए पवन बाबा, बागी बलिया की धरती से अवध की नवाबों की धरती तक इनका जलवा हमेशा कायम रहता है । इनकी बाते क्रांतिकारी होती हैं , नशे के मामलें में इनको देखकर ही पहचाना जा सकता है । ये इतने क्रांतिकारी हैं कि एग्जाम की डेट कहीं से ना कहीं से एक दिन पहले जरूर पा जाते हैं । क्योंकि ये मेल आदि देखने में विश्वास नही रखते हैं । एग्जाम हॉल में 10 मिनट बाद ही आना मुनासिब समझते हैं ।
अब आइये मिलते हैं क्लास की दमदार तिकड़ी और अटूट दोस्ती की प्रतिमूर्ति अंजलि, सौम्या और वैशाली T से । क्लास में इनके आगे बैठना सबसे खतरनाक भरा काम है ,क्योंकि पीछे से सौम्या का टोन मारना आपको टीचर के सामने फंसा सकता है ।ये जितनी मासूम दिखती हैं उतनी हैं नही ,धीरे से आपकी पीठ पीछे झुक के मोबाइल में टिपटिपाना और जोक्स मारना आदत है , जिसे सुनकर आपकी हंसी कभी भी निकल सकती है और आप टीचर के सामने मोस्ट वांटेड हो सकते हैं । अंजलि अब जल्द ही दिल्लीवासी होने वाली हैं , गंभीर मुद्दों को शानदार तरीके से शब्द देना इनकी काबिलियत का हिस्सा है । क्लास में सौम्या की टोन वाली बातों को बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उठाती हैं । इन सबके बीच वैशाली T के पास हंसते रहने के अलावा कोई काम नही बचता । ये एग्जाम के दिनों में सौरभ के लिए किसी अवतार से कम नही होती ।
अब आते हैं , कमीनेपन के मोस्ट वांटेड लोगों के पास जिनमे राजसी,निधि,सौरभ,कुसुम,ज़करिया,सोनाली सिंह, रबिंशु हैं । ये आपस में ही सबकी बैंड बजाने का कोई मौका नही चूकते , अगर आप गलती से इनके बीच पड़ गए तो लेने के देने पड़ सकते हैं । आप ई कहेंगे तो ये ईस्लामबाद खुद बना देते हैं । ये आपस में मम्मी ,पापा,बेटी,बेटा बने हैं ,अब इनमे कौन क्या है बड़ा कन्फ्यूजन है भाई । इनकी अगुआ हैं राजसी, इनकी क्रिएटिविटी इनकी विशेषता है , हालांकि ये किसी काम को लेकर जल्दबाज़ी दिखा देती हैं, और जहाँ दिखाना चाहिए वहां वेटिंग करायी हुई हैं । इनकी सबसे बनती है , और किसी की भी बैंड बजाने को ये हमेशा लालायित रहती हैं । इनकी ड्राइविंग लाइसेंस के लिहाज से दो पहिया से लेके ट्रक तक ये चला लेती हैं । क्लास की सबसे बड़ी ब्लॉगर हैं और विभिन्न जगहों पर इनके लेख भी छप चुके हैं । किसी भी काम को बड़ी शिद्दत से करती हैं । इनको अपना बेस्ट फ्रेंड क्लास में नही सीनियर में देव साहब हैं । जो इनके इर्द गिर्द हमेशा देखने को मिल ही जाते हैं ।खेलों की दीवानी राजसी ,हिट मैन क्रिकेटर रोहित शर्मा की दीवानी हैं ये, शायद इनका दिल तब उतना नही टुटा होगा जब इंडिया वर्ल्ड कप से बाहर हुई , जितना कि रोहित शर्मा की शादी के बाद इनका दिल टूटा, इनकी एक आदत ये भी है की जब ये किसी रूठे हुए को मनाती हैं तो मनाती कम हड़काती ज्यादा हैं । लेख के सफ़र में आती हैं कुसुम , इनका ज़िक्र थोड़ा सा कर चूका हूँ ,जितना खूबसूरत इनका गृह जनपद सोनभद्र है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत ये रंगोली बनाती हैं और मेक अप करने की प्रतिभा इनकी रग रग में हैं ब्लंडर बाबा के किरदार की जीवंत बनाने में इनका विशेष सहयोग रहा है ( इनमे राजसी और निधि का भी मैं शुक्रगुज़ार हूँ )। ये बैंड बजाने वालों में राजसी की राईट हैण्ड हैं । जैसे कभी दाऊद का राईट हैण्ड छोटा राजन हुआ करता था । सौरभ को ये अक्सर निशाना बनाया करती हैं । इनको नेतृत्व करना अच्छा लगता है लेकिन राजसी इनको कड़ी टक्कर देती हैं । कविताएं लिखने का शौक इनका भी है । अर्पित इनके लोकप्रिय टारगेट हुआ करते हैं , जब भी मौका मिलता है तो एक सटायर चिपका ही देती हैं । इन्ही की शहर से जुड़ी एक और शख्शियत हैं सोनाली सिंह, जो इनको जानते हैं वो इनसे संभल के ही बात करते हैं क्योकि ये आपको कहीं भी और कभी भी गालियों से तौल सकती हैं । आधी हिंदी और आधी इंग्लिश में अपने किसी वाक्य को पूरा करने वाली सोनाली नेक दिल और इमोशनल व्यक्तित्व की हैं । हम अपने एक्सीडेंट में भले ना रोये हों लेकिन सोनाली की आँखों के आंसुओं ने हमारी अहमियत बढ़ा दी । इनकी बेबाक शैली और इनकी गालियों का अंदाज़ इन्हें सबसे अलग करता है । अब आती हैं निधि, चश्मे वाली निधि हमारी क्लास की एकलौती धरोहर हैं जो ABP के फाइनल राउंड तक गयी थीं । मुस्कुराते रहना और कूल दिखना इनकी पहचान है । ये किसी भी युगल जोड़ी पर कमेंट पास करना इनकी फितरत है । ओह्ह्हो ये बात !! जैसे शब्दों का प्रयोग अक्सर करती हैं जब किसी की बैंड बजाई जा रही हो तो । ये सबके साथ सबकी बैंड बजाओ वाले फार्मूले को मानती हैं । आकाश और पूजा अक्सर इनके निशाने पर रहते हैं । यूँ कह लें की अगर कहीं किसी के साथ "खेला" जा रहा हो तो वो इनके बिना सब अधूरा है । अब आते हैं सौरभ, सौरभ एक सफल फोटोग्राफर हैं या यूँ कह लें क्लास के एकलौते सेटल पर्सन । इनके जैसा इंसान पहली बार देखा है क्योंकि ये जब लड़कों के बीच होते हैं तो एकदम सीधे व्यक्तित्व वाले होते हैं । जैसे ही लड़कियों के बीच जाते हैं इनकी "खुराफातें" शुरू हो जाती हैं । द्विअर्थी बातें इनके मुख द्वार से लोगों के श्रवण द्वार तक आने लगती हैं। एग्जाम के दिनों में अगल बगल वाला इनके लिए किसी भगवान से कम नही होता ।ये पवन के समकक्ष हो जाते हैं परीक्षा से एक दिन पहले वाली रात को ये सिलेबस के लिए तड़प उठते हैं । लोगों से गुहार लगाते हैं कोई तो भेज दो कमीनो। पहले और दूसरे सेमेस्टर की इनकी अवतारित देवी वैशाली T रहीं हैं । अगर आप इनकी आवभगत करने को इच्छुक हैं तो बता दूँ की पानी मिनरल वाटर की व्यवस्था करियेगा । बाकी मसालों से इन्हें परहेज है । इनकी कैमरे की प्रतिभा विब्ग्योर में देखने को मिल चुकी है ।एक और शख्श हैं रबिंशु, DD में कार्यरत रबिंशु एडिटिंग अच्छी कर लेते हैं । हँसते हुए ये गले से अलग से आवाज़ भी निकाल लेते हैं । अर्पित इनके सबसे प्रिय मित्र हैं । मिमिक्री इन्हें बहुत पसंद है । अब मिलते हैं ज़करिया से , उर्दू ज़ुबान के धनी ज़करिया का नाम लेने में अगर थोडा भी चुके तो ये तुरंत संज्ञान में लेते हुए उसे ठीक कराते हुए कहते हैं ज़....क.......रि....या.... ज़करिया । इनकी तालीम मदरसों में हुई है इसलिए इनको खुलने में वक़्त तो लगा । कवितायें और ग़ज़लों के लिखने के शौक़ीन ज़करिया उर्दू की पत्रकारिता करने की तयारी कर चुके हैं ।
अब बचे हैं वो जिनके साथ MJMC में वक़्त मैंने सबसे ज्यादा बिताया है , जी हाँ ये हैं आकाश,पूजा,पंकज,विकास और सोनाली कन्नौजिया.. इनमे सबसे पहले पहले ज़िक्र करूँगा पूजा और सोनाली की । इनको एक शब्द में कहूँ तो ये हमारी क्लास की मोदी हैं , अब आप सोचेंगे की मोदी क्यूँ, मोदी इसलिए क्योंकि पूजा जहाँ उनकी तरह फ्लाइट में यानि घूमने के मूड में रहती हैं वहीँ सोनाली का कैमरा प्रेम उन्हें मोदी की समकक्ष खड़ा करता है । पूजा को घूमने फिरने का शौक बहुत है । वैसे ये मुझ पर तोहमत लगाती हैं कि मैं अच्छा श्रोता नही हूँ , लेकिन इस मामले ये भी मुझसे कम नही हैं । इनके दिमाग में घूमने का कुछ ना कुछ प्लान पकता ही रहता है । वहीं सोनाली फ़ोटो खिंचवाने के लिए एक ही पोज देने लिए विख्यात हैं । अगर आप इनसे मज़ाक में भी मोबाइल या कैमरा लेके कहेंगे आओ फ़ोटो क्लिक करते हैं तो तुरन्त पोज दे देती हैं , बिना चेक किये कि कैमरा ऑन है या नहीं । लोगों बीच फासलों के लिए 26 का आंकड़ा काम करता है तो इनको जोड़ने का आंकड़ा 2028 है । अब आते हैं पंकज , इनको अगर समझना है तो इनकी आँखों को पढ़ने की काबिलियत होनी चाहिए। ये आँखों से खेलने में माहिर हैं । इन्हें लोगों को उनके ओरिजिनल नाम नही पसंद आते इसलिए उनके नाम अपने अनुसार जेमी,रेमी,आदि रख लेते हैं ।इमोजी से खेलने में ये कोमल को टक्कर देते हैं । इनके पास कहानियों की कोई कमी नही हैं ,और हर समस्या का कोई ना कोई हल इनके पास निकल ही आता है । आपकी हर समस्या से जुड़ी 8 से 10 तरह के निदान ये हमेशा रखते हैं । चेहरे से हताश परेशान दिखने वाला ये शख़्स अक्सर इधर उधर ताड़ते मिल जाता है । पंकज को समझना डॉन को पकड़ने के बराबर है, वही डॉन जिसकी 11 मुल्कों की तलाश थी । अब आ गए विकास , ये हमारे साथ के लोगों में सबसे सुलझे इंसान हैं । पूजा के डायलॉग 'अपणे को क्या है अपणे को तो बस........' विकास इसके बाद तुरंत कहते हैं पाणी निकालना है । इनकी इस डायलॉग को लेकर जुगलबन्दी ठीक वैसे ही है जैसे भारत माता की ,.......के जय बोलना । ये बोलते बहुत कम समझते ज्यादा हैं । हमारी गलतियों को बारीकी से अध्ययन करने के बाद अकेले में ले जाकर बढ़िया से तौलते हैं । इनका निष्कर्ष गलत नही होता । इसीलिए मैं इनको बुढ़ऊ के नाम से बुलाता हूँ ।लोगों का अध्ययन करके ये कई चौंकाने वाले खुलासे भी कर चुके हैं ।अब अंत में बचे आकाश , आकाश के बारे में क्या बताना जो मुझे जानता है वो आकाश को तो जानता ही होगा । आखिर कुछ दोस्ती ही हमारी ऐसी है । हमारी जुगलबन्दी देखकर मैम बे तो हमें जय वीरू की जोड़ी से नवाज़ रखा है । इसमें सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन वाली बात ये है की हममे से आखिर कौन जय और कौन वीरू है , क्योंकि आकाश बोलने के मामले में जय और बाकी के मामलों में वीरू हैं । इनसे हमारी मुलाक़ात के बाद जब दोस्ती ने रंग चढ़ाना शुरू किया तो इन्होंने एक शर्त रखी थी कि लड़कियों से थोड़ा कम बोला करो । फिलहाल ये मुझे तो नही बदल पाये लेकिन मैं इनको बदलने में जरूर कामयाब रहा क्योंकि अब ये भी सबसे बकलोली करने में मुझे काफी पीछे छोड़ चुके हैं ।कुल मिलाकर अब ये एक इंसान बनने की ओर अग्रसर हैं । वैसे इस दोस्ती के बारे में बताने कहने सुनने को बहुत कुछ है और अभी बहुत सी यादों का जुड़ना बाकी है । इस दोस्ती के बारे में बस इतना ही कहना है कि हमने दोस्ती शब्द के ढाई अक्षर में बेमिसाल अपनेपन का भारी भरकम अहसास जोड़ लिया है । अब इस दोस्ती के बारे में ज्यादा नही कहेंगे क्योंकि डर लगता है किसी की नज़र ना लग जाए। वैसे तो मैं इन अंधविश्वासों को नही मानता फिर भी यहां मान लेते हैं ।वैसे इसमें बहुत कुछ जुड़ना अभी बाकी है मेरे दोस्त ...
तो दोस्तों इस लेख को लिखने का मेरा मक़सद किसी की आलोचना या तारीफ़ करना नही है । हमने सभी के बारे में कुछ न कुछ कहने की भरपूर कोशिश की है । कोशिश इसलिए कि MJMC के 2 सालों के अहसास को ताउम्र जिन्दा रखने की एक पहल है । मैंने किसी के बारे में जो भी लिखा है वो उनकी पहचान या बायोडाटा नही है । बस जिंदगी के किसी मोड़ पर ये पोस्ट दिखेगी तो शायद सबके चहरे अपने आप याद आ जायेंगे ।कई बार कुछ बहुत इमोशनल टाइप लिझ गया था जिसे डिलीट भी किया क्योंकि इसे लिखने से पहले सोचा थोड़ा मज़ाकिया अंदाज़ में लिखूंगा लेकिन जब लिखने बैठा तो शायद बहुत कुछ छूट गया या यूँ कहे लिख नही पाया ।चूँकि मैं इमोशनल यादों को ज्यादा अच्छे से लिखने में कम्फर्ट महसूस करता हूँ इसलिये इस लेख से शायद न्याय ना कर पाया होऊंगा तो इसके लिए अपने अंदाज़ में #गुस्ताखीमाफ । बस इसी उम्मीद के साथ अलविद
Comments
Nice one bro
ReplyDeleteGood1
ReplyDeleteGood1
ReplyDeleteNice one
ReplyDeleteNice one
ReplyDeleteआभार आप सभी का
ReplyDeleteआभार आप सभी का
ReplyDeleteलेखनी बहुत अच्छी है। बधाई आपको।
ReplyDeleteधन्यवाद :)
ReplyDeleteधन्यवाद :)
ReplyDeletethank u sushil bahut acha likha hai....
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