अलविदा 2015 , स्वागतम 2016

साल 2015 , हर साल की तरह ये साल भी आखिर अपनी खट्टी मीठी यादों के साथ विदा हो ही गया । एक साल को रुखसत करते समय हम अक्सर  आने वाले साल का स्वागत उम्मीदों और इस प्रबल भावना से करते हैं कि ये साल सबके जीवन के लिए सुखमय होगा । ये ऐसा पहली बार नही है और ना ही ये अंतिम बार है । हम उम्मीदें अच्छे की ही करते हैं लेकिन अच्छा और बुरा एक सिक्के के दो पहलु हैं जिनको इनकार नही किया जा सकता । सुख दुःख हमारे जीवन का हिस्सा होता है,यही हमारे जीवन की उपयोगिता को व्यक्त करती है । अक्सर जब कोई चीज हमसे छूट रही होती है तो उसमें से कुछ अच्छी यादों को समेट लेने की एक हुक सी उठती है । उसको फिर से जी लेने की इच्छा मन ही मन को तड़पा देती है । लेकिन एक शाश्वत सत्य के सामने हमें घुटने टेकने पड़ ही जाते हैं, 'जो आया है उसे जाना होगा' । उनको ना चाह कर भी अलविदा कहना ही पड़ता है । हर बार की तरह इस साल को भी हम जाने से नही रोक सकते । हां यादों जरूर समेट सकते हैं अपने ज़ेहन में । आज मैं इस साल की यादों को बस समेटने की एक कोशिश कर रहा हूँ ।
          हर बार की तरह इस साल की शुरुआत भी मेरे लिए एक सामान्य ही रही है । ना इसके आने का कोई जश्न मना , ना उसके बीतने का कोई दुःख । हाँ पहला दिन दोस्तों के साथ बिता , खुशनुमा माहौल में  । ये साल एक भारतवासी के लिहाज़ से देखूं तो जहाँ ये मोदी जी की विदेश यात्राओं को लेकर चर्चित रहा तो नेताओं उल जुलूल बयानबाज़ी ने भी काफी चर्चा बटोरी । साल के अंत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा ''असहिष्णुता"  पर काफी बवाल भी मचा । जो अक्सर चुनावों के समय देखने को मिल ही जाता है । अमानवीय घटनाओं में अख़लाक़ की हत्या ने मानव सभ्यता पर कलंक की तरह रहा । तो उधर 'निर्भया' काण्ड के 3 साल बाद 'नाबालिग अपराध अधिनियम' में बदलाव भी हुआ । जिसमे नाबालिग की उम्र सीमा 16 साल से घटाकर 14 साल किया । असहिष्णुता मुद्दे ने टॉलरेंस के हिंदी शब्द को ज्यादा तवज्जो दिलाई , कान्वेंट में पढ़ने वाले बच्चे शायद ही असहिष्णु (हिंदी शब्द) शब्द को कभी जाना हो तो इस बार इस शब्द की अहमियत और उच्चारण भी आ ही गया होगा । ये साल बॉलीवुड कलाकार सलमान के लिए जाते जाते खुशियों की सौगात दे गया, तो अन्य सभी लोगों के लिए मिला जुला रहा । खेल के लिहाज़ से भी ठीक ठाक रहा ,लेकिन हॉकी ने जज़्बा दिखाया जिसके लिए भारतीय हॉकी टीम विख्यात रही है वो लय फिर से देखने को मिली । अर्थव्यस्था ने चिंता बरकरार रखी तो जाते जाते बुलेट ट्रेन का सपना साकार हुआ । ये साल अगर किसी बात के लिए सबसे ज्यादा जाना जायेगा तो वो है 'प्रकृति का गुस्सा' । देश भर के हिस्सों में भूकंप का खौफ रहा । तो जाते जाते चेन्नई को डुबो दिया । कुल मिलाकर देखा जाए तो ये साल पिछले साल से ज्यादा उथल पुथल भरा रहा । शायद मैं इन सबमे बहुत सी  बातों को भूल गया होऊंगा, जिनका ज़िक्र नही किया हो ,तो बहुत सी बातों को जानबूझकर छोड़ दिया ।
      अब थोड़ी सी बात कर लूँ अपने व्यक्तिगत जीवन की। ये साल मेरे लिए अन्य सालों की अपेक्षा काफी अलग रहा । अलग इसलिए क्योंकि इस बार बहुत सी ऐसी बाते हुईं जो शायद ही कभी भूलें । क्योंकि वो सब होने की मैंने कभी कल्पना नही की थी। दोस्तों के लिहाज़ से मैं हमेशा भाग्यशाली रहा हूँ । दोस्त हमेशा अच्छे मिले हैं तो इस बार भी इससे वंचित नही रहा । साल की शुरुआत मस्ती भरी रही तो यो अंत तक आते आते एक सबक और नयी ज़िन्दगी दे गया । इस साल का सबसे यादगार लम्हा क्लास का माहौल रहा जहाँ हमने पहली बार जिंदगी में रेडियो के समानांतर  जैसे कार्यक्रम का हिस्सा बना ।"गीतों भरी कहानी" में अपनी स्वयं की लिखी कहानी "चिट्ठी" पर कार्यक्रम किया जो मेरे पत्रकारिता का जीवन का पहला और सबसे यादगार कार्यक्रम रहा ।फिर वीडियो फ़िल्म का भी हिस्सा बना जो "विब्ग्योर" के रूप ने एक बड़ी याद बना  इसके लिए मुकुल सर,पिंटू सर, सुरभि मैम का मार्गदर्शन जीवन के लिए अभयदान बन गया  ।  नुक्कड़ नाटक साथियों के साथ किया तो राजनितिक बहसों का हिस्सा भी बना । घूमने के लिहाज़ से काफी घूमने को भी मिला आगरा , मथुरा, सोनभद्र इस साल की सुखद और मैत्रिमयी यात्राओं के नाम रहा । तो राजस्थान उदयपुर की अधूरी यात्रा ने नया जीवन और बड़ा सबक दे दिया । उदयपुर की यात्रा  भयानक सड़क दुर्घटना का शिकार हुई जहाँ हम सभी को एक नया जीवन मिला । तो इस दुःख की घड़ी ने कुछ दोस्तों की असलियत से पहचान भी कराई। जो ज्यादा चकित तो नही करता हां लेकिन सोचने के लिए विवश जरूर करता है । वैसे भी हम सारे दोस्त इस सदमे से उबरकर मिली इस नयी जिंदगी को फिर से सजाने संवारने की तैयारी में लगे हैं । इधर देखते देखते ये साल जाने की तैयारी में है और हम यादों को समेटने में । जब इसे मुकम्मल समेट पाने में असफल हुआ तो इसे शब्द देकर सहेज़ने की कोशिश की । लेकिन शायद अब भी बहुत कुछ कहने को छूट गया तो कुछ भूल भी गया । ज़िन्दगी के इस बेहतरीन सफ़र में कुछ चुनिंदा लोगों का साथ इसे बेहतर बनाता रहा है ।अब आगे भी उन लोगों का साथ यूँ ही हमेशा बना रहेगा इसी उम्मीद के साथ ,अलविदा 2015 ,स्वागत 2016 ।
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