बस यूं ही ..............


मैंने कब कहा तुझसे की ,
मेरे सपनों का संसार दे दे ,
खुद चला जाऊंगा मौला तेरे दर से ,
बस मेरे यार को मेरी मोहब्बत का पैगाम दे दे ।

मैंने कब कहा तुझसे कहा की ,
ये जन्नत की हसीन वादियाँ दे दे ,
इन अप्सराओं का नूर तू रख मौला ,
मुझे तो बस मेरे यार का मुसकुराता साथ दे दे ।

मैंने कब कहा तुझसे की ,
दुनिया भर की शोहरते मुझे दे दे ,
मैं कल भी उसका था और आज भी उसका हूँ मौला ,
बस ये दुनिया के हर अखबार मे इस्तिहार दे दे ।

मैंने कब कहा तुझसे की ,
तू मुझे दुनिया को जीतने का अंजाम दे दे ,
इससे पहले की मैं टूट कर बिखर जाऊ ''सुशील'' ,
तू फिर से मेरे पूर्णिमा की चाँद का साथ दे दे । ....................... सुशील

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