एक अधूरी कोशिश , यादों की होली के साथ.....!!!!!!

खेली थी पिछली होली जो तेरे संग,
आज भी उसकी याद बाकी है,

मेरे ना खेलने की आदत पर जब तुम रुठी थी,
फिर तुझे लगाया मेरा अभी वो गुलाल बाकी है,

खिलाई थी जो तुमने प्यार की गुझिया,
आज भी उसकी मिठास ताजी है,

पिछले बरस भिगोया था तुमने जिसे,
आज भी वो रुमाल गुलाबी है,


आई है इस बार होली तेरी याद बनकर साथी,
अब तुम भी आ जाओ अभी तो आज की शाम बाकी है........सुशील 

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