एक कहानी ऐसी भी , सुशील के साथ ........

                              





              मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिले मऊ का निवासी हूँ । बात 2006 की है जब मैं 9वीं कक्षा का छात्र था और ये मेरे दुनिया को जानने व समझने की शुरुआत थी , उस समय मेरे गाँव के बड़े भाई लोग सेना -पुलिस की तैयारियो के लिए सड़क पर दौड़ने का रिदम बना रहे थे । मेरी भी लंबाई बढ़ रही थी सो मेरा भी मन होता था कि मैं भी दौड़ूँ ,और देश सेवा करूँ।  प्लान बन गया,मैं औरे मेरे तीन दोस्त शेरबहादुर , जितेंद्र और विनोद सुबह 4 बजे एक निश्चित जगह पर इकट्ठा होते क्योंकि उस समय हममे से किसी के भी पास फोन नहीं था ,और वहाँ से उस सड़क पर जाते जहां सब लोग दौड़ते थे वो सड़क हमारे गाँव को शहर से जोड़ती थी ।
                      एक दिन अचानक मेरी नींद खुली मैंने घड़ी देखा , सुबह के 5 बज चुके थे , मैंने जल्दी जल्दी जूते पहने और भागता हुआ वह पहुंचा जहां सब मिलते थे लेकिन वहाँ कोई न था ,शायद सब आगे बढ़ गए  थे । मैं फिर सड़क पर गया ,चाँदनी रात अपने सबाब पर थी पर उस समय मुझे दूर दूर तक कोई ना दिखा , मैंने सोचा सब  आगे होंगे  और मैं धीरे  धीरे आगे बढ़ गया , लेकिन एक जगह जाकर मैं थोड़ा झिझका क्योंकि वो बाग आ गयी थी जिसके बगल मे एक कब्र थी और वहाँ कोई भी अकेले रात मे नहीं जाता था । ऐसी वहाँ कि मान्यता थी कि वहाँ भूत पिशाच रहते हैं और अकेला पाकर लोगो को परेशान करते हैं ।
                     तभी मैंने देखा कि 3 लोग वहाँ पर दौड़ रहे थे , अब मेरी जान मे जान आई । मुझे लगा की वो जान पहचान के हैं, क्योंकि उन एक महीने मे काफी लोगो से जान पहचान हो चुकी थी । मैंने उन्हे आवाज देकर पूछा -''भैया शेरु, जितेंद्र ,विनोद (मेरे दोस्तों के नाम) को आप लोगो ने देखा क्या ? उधर से जवाब आया- ''हाँ वो लोग आगे गए हैं'' । उनकी आवाज मुझे थोड़ी अजीब सी लगी क्योंकि ऐसी आवाज मैंने पहले कभी नहीं सुनी थी । फिर मैं उनके पास जाने के लिए थोड़ा तेज दौड़ना शुरू किया, लेकिन वो लोग भी तेज दौड़ने लगे ,मैंने बहुत कोशिश की लेकिन हमारे बीच का अंतर बराबर बना रहा ,तभी मुझे लगा कि पीछे कोई  आ रहा है , मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था , लेकिन जैसे ही मैंने आगे देखा तो सन्न रहा गया, वो तीनों भी गायब हो गए थे जो मेरे आगे थे । अब मुझे थोड़ा थोड़ा डर लगने लगा था , कि तभी अचानक बगीचे कि तरफ झाड़ियों मे कुछ हरकत हुई कि तभी अचानक से एक बड़ा सा  जानवर जो शायद भैंसा था, आया और लगभग मुझे छूते हुए सामने से निकला और वो भी मुश्किल से 5 या 6 कदम पर जाकर गायब हो गया । अब मेरे मन मे तरह तरह की शंकाए घूमने लगी और मैं बहुत ज्यादा डर गया था । और कुछ हिम्मत  करके मन मे भगवान को याद करते हुए आगे बढ़ा तभी एक कुत्ता आया और बराबर मे आके चलने लगा मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया , लेकिन कुछ पल के लिए जैसे मेरा ध्यान उस पर गया मानो मेरे शरीर मे खून ही ना बचा हो ऐसा प्रतीत हुआ क्योंकि , वो कुत्ता कभी बकरा बन जाता, तो कभी सियार तो कभी कुत्ता । अब मुझे पसीने छूटने लगे थे ,और मैं तेज भागने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरे कदम मानो आगे बढ़ ही नहीं रहे थे ।
               बहुत कोशिश के बाद हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ा लेकिन थकान की वजह से चल नहीं पा रहा था की तभी कंधे पर किसी ने हाथ रखकर कहा - 'सुशील कैसे हो, आज अकेले ही चले आए ' । मैंने तुरंत पलटकर देखा तो एक बुढ़िया थी जिससे शायद ही मैं कभी मिला होउ ऐसा मुझे याद नहीं आ रहा था , लेकिन उस रोड पर काफी महिलाएं भी जॉगिंग करती थी तो मैंने सोचा होगा कोई । एक से भले दो अब थोड़ा सा डर कम हुआ ही था कि उस बुढ़िया ने फिर पूछा-'अकेले क्यों आए हो ,और सब कहाँ हैं ?मैंने सारी बात उन्हे बताई । फिर बात करते हुए हम आगे बढ़े तो मुझे आश्चर्य हुआ कि वो मेरे बारे सब जानती थी ,और मैं उन्हे पहचानता भी नहीं था । फिर उसने बातों बातों मे मुझसे समय पूछा मैंने घड़ी कि तरफ नजर उठाई तो देखते ही मेरे हौसले हवा हो गए क्योंकि उस समय घड़ी मे रात के 12 बजकर 50 मिनट हो रहे थे । और  मेरी नजर उस बुढ़िया कि तरफ गयी जो मुस्कुरा रही थी ,और उसके चेहरे की बनावट मे परिवर्तन हो रहा था कभी एकदम युवा महिला तो कभी बुढ़िया मेरे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी मैंने फिर  घड़ी मे देखा तो घड़ी कि तीनों  सुइयां तेज गति से घूम रही थी , मेरा शरीर काम नहीं कर रहा था और तभी मेरी नजर उस बुढ़िया के पैर पर गयी और मैं एकदम से नीला पड़ गया था क्योंकि उसके पैर ............... उल्टे थे ।
                 मैं वहीं रोड पर गश  खाकर गिर गया था और जब होश आया तो मैंने खुद को अपने तीनों दोस्तों के साथ पाया वो मुझे पानी पिला  रहे थे और पूछ रहे थे मैं  यहाँ कैसे आया । मैंने सारी कहानी उन्हे बताई और फिर हम घर चले आए ।फिर मुझे याद आया जब मैं सुबह उठा था और जल्दी जल्दी मे मैंने घड़ी देखी थी उस समय सुबह के  5 नहीं रात के 11 बजकर 25 मिनट हो रहे थे ,शायद मैं सुइयो की वजह से कनफ्यूज हो गया था ।   उसके बाद मैं कभी भी जॉगिंग नहीं गया । तो ये है मेरी कहानी ,आपको कैसी लगी ।
               
 


 

                  
    


   
       

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