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तेरी यादें ! कितनी अजीब
है ना । तू नहीं है ,फिर भी तेरी यादें मुझमे, तेरा वजूद बनकर आज भी मेरे साथ हैं। मैंने जब भी कोशिश की है इनसे दूर
जाने की हर बार मैं असफल ही रहा हूँ । अरे हाँ ! असफल से याद आया,असफल तो मैं तुझे पाने मे भी रहा हूँ ,असफल तेरी
यादों से दूर जाने मे भी रहा हूँ । बहुत शिकायत है तुझसे,
क्यों मुझे इस मोड़ पर अकेला छोड़ के चली गयी। एक बार ना सोचा क्या होगा मेरा ,जो एक पल तेरे बगैर रहने की सोच मात्र से सिहर उठता था ,वो बिन तेरे कैसे पूरी जिंदगी बिताएगा ,क्या ये तुझे
ख्याल भी नहीं आया ?
मैं तो इस अंजान शहर मे अजनबी ही ठीक था ।
क्यों तुमने मुझे इस शहर की रिवायतों से परिचित कराया , क्यों तुमने मुझे इतनी इज्जत बख्शी । मेरे साथ चलने की जिद भी तो तुमने
ही की थी ,फिर मुझे छोड़ जाने का इरादा क्यों किया ? वो पल वो लम्हे, जब हम साथ थे ,वो आज भी मुझसे सवाल किया करते हैं ,कि आज इतने
तन्हा क्यों हो और कब तक रहोगे ? वक़्त तो गुजर रहा है तुम
बिन,पर ना जाने क्यूँ साँसे थमी थमी सी रहती हैं। हमेशा
मुकुराते भी रहते हैं फिर भी आंखे नम सी रहती हैं। एक गिला है तुझसे तेरी इस
रुसवाई का,जाते जाते ये तुम मेरे लिए तनहाई का मौसम क्यों
छोड़ गए ? तनहाई का एक लंबा सफर तय किया है मैंने तुम्हारे
बिना, आखिर अपनी बेबसी कहता भी तो किससे ? क्योकि ये शहर भी तो तेरा था और यहाँ लोग भी तेरे थे।
जब यादों के पन्नो को खोलता हूँ तब तुम बहुत
याद आती हो । दोस्त बहुत मिले इस अजनबी शहर के छोटे से सफर मे,पर तेरी कमी हमेशा खटकती है । किताबों के पन्नो को पलट कर सोचा करता हूँ ,कि काश यूं ही जिंदगी भी पलट जाती तो क्या बात होती । शायद तुमने मेरा साथ
ये सोचकर छोड़ दिया कि तुम्हें देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं था। पर तुमने ये
क्यों नहीं सोचा कि तुम्हें खोने के अलावा भी तो मेरे पास कुछ नहीं था ? बहुत समझाता हूँ मैं अपने दिल को पर ये समझता ही नहीं है । तुम शायद अब
अपनी दुनिया मे बहुत खुश हो, लेकिन मेरा क्या हाल है कैसे
बताऊँ तुझे ? मैं तुम्हारे लिए सबसे अच्छा हूँ ये दावा तो
नहीं करता,ये भी हो सकता है कि मेरे से बढ़िया कोई तुम्हें
मिल ही जाये। मगर मेरी तरह तुम्हें कौन चाहेगा ? तुम्हें
जरूर कोई चाहतों से देखेगा, पर वो मेरी नजर कहाँ से लाएगा ? तुम्हारे साथ जो मौसम कभी फरिश्तों जैसा था ,ये
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा । जब तुम पहली बार
मिली तो ना जाने क्यूँ वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी थी । कुछ तो था तेरी बातों मे
जादू, क्योकि पहली बार किसी कि दोस्ती इतनी जरूरी लगी थी ।
शिकायते तो बहुत है तुझसे ,पर क्या कहूँ , तुम्हारी याद मे एक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं –
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तेरे बिन अब चुप चाप रहना
अच्छा लगता है ,
खामोशी से दर्द को सहना
अच्छा लगता है ,
तेरी याद मे आंखो से बरसते
है आँसू ,
पर तेरे सामने कुछ ना कहना
अच्छा लगता है ।
फिर मिलकर बिछड़ ना जाएँ
तुझसे ,
इसलिए बस दूर ही रहना
अच्छा लगता है ,
जी करता है सारी खुशियाँ
लाकर तुझे दे दूँ ,
तेरे प्यार मे सब कुछ खोना
अच्छा लगता है ।
तेरा मिलना ना मिलना
किस्मत कि बात है ,
पल पल तेरी याद मे रोना
अच्छा लगता है ,
तेरे बिन सारी खुशियाँ
अजीब सी लगती हैं ,
रो रो कर तेरी याद मे सोना
अच्छा लगता है ।
मोहब्बत कि नुमाइश ना हो
मुझसे ,
साकी बस इतना जानते हैं , कि
तुझे चाहते रहना अच्छा
लगता है ॥
इसमें काफी सचाई सी लगती है
ReplyDeleteअच्छा बया कर लेते हो
Beautiful......
ReplyDeleteVery nyc...
ReplyDeletevery heart touching....
ReplyDeleteप्यर आता है बहार लेकर अतातो है जाता है तो गम की बरसता कर के जाता है
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